मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

दे घुमा के:भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हो


एक सबसे बड़े गुनाह की कोई सजा नहीं है . भ्रस्टाचार एक ऐसा  गुनाह है जिसमे देश की अदालतों में करीब १७ हजार से ज्यादा मामले लंबित पड़े है . एन मामलो के हल होने की रफ्तार इतनी धीमी है की साल दो साल में एक हजार भ्रष्टलोगो को भी सजा नहीं मिल पति .एन .सी .आर .बी . की तजा रिपोर्ट ये बताती है की आई पीसी की धाराओ के तहत लगभग २९११७ लोगो पर मामले चल रहे है .वर्ष २००९ में इनमे से करीब ३२२८ लोगो के मामले की सुनवाई तो हुयी लेकिन मात्र ९६३ ही दोषी करार दिए गये . एस समय अकेले सी .बी .आई . के पास ९९१० भ्रस्ताचार के मामले लंबित पड़े है .एन मामलो में सबसे ज्यादा १७५९ दिल्ली और १०६२ महारास्ट में है एन आकड़ो का ये मतलब नहीं क़ि अन्य प्रदेश पाकसाफ है बल्कि वहाँ भ्रस्टाचार इतना है क़ि भ्रस्टाचार के मुकद्दमे भी दर्ज नहीं हो पाते .

भ्रस्टाचार में अंकुश लगाने के लिए ये जरुरी ही जाता है क़ि हम भ्रस्टाचार निरोधक कानून १९८८ को बदले क्योकि एस कानून के प्रावधान के तहत मात्र पाँच वर्ष क़ि सजा का प्रावधान है पर इसमे मुजरिम की सम्पति को जब्त करने का कोई प्रावधान नहीं . एक इंटरनेश्नल रिपोर्ट का कहना है कि भारत में सरकारी महकमो में कम करने के लिए कम से कम ५० फीसदी लोगो को अपना वाजिब काम निकलने के लिए अधिकारियो को घूस देनी पडती है .एस कारन भ्रटाचार की सूचि में भारत ८७ वे स्थान पर है पि. आर. सी. का सर्वे यहा बताता है कि भारत नंबर ४ पर एशिया प्रशांत के सबसे भ्रष्ट १६ देशो में है .लगभग ७० लाख करोड़ रूपये जमा है भारत का स्विस बैंक के खातो में ये एस बात का गवाह है कि हमारे देश के तथाकथित बड़े लोग कितने भ्रष्ट है. आज हमें जरूरत है गाँधीवाद कि सच्ची परम्परा के अनरूप आचरण करने की. क्रिकेट की तरह एकजूटता के साथ यह वक्त हम सब के उठ खड़े होने का है .भ्रस्टाचार के खिलाफ . अन्ना हजारे की  अपील पर ध्यान  दीजिए यहाँ वक्त आपके आत्मबलिदान का है . प्रधानमन्त्री से अनुरोध  है कि जन लोकपाल विधेयक को पारित कराये नहीं तो अगले चुनाव में हम मजबूरन उनकी पार्टी को वोट नहीं देगे .शांत रहा कर अपनी बात कहे . एक बार फिर भ्रस्टाचार से स्वतंत्र होने के लिए इस अगले स्वतंत्रता आन्दोलन में जेल जाने का साहस जुटाए. आप हम सब जिस जुनून की हद से क्रिकेट को प्यार करते है उसी जुनून से भ्रस्टाचार को ख़त्म करने की मुहिम में अन्ना हजारे की टीम का साथ दीजिए .भ्रस्टाचार को ख़त्म करके भ्रष्ट मुक्त समाज का विश्वकप जीतिये दीजिये
दे घुमा के .

6 टिप्‍पणियां:

  1. भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए जो मशीनरी बनाई जाती है वह खुद पहले से भ्रष्ट होती है।

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  2. aaj bharat ke kan kan me bhrashtachaar failaa hua hai.aaj bharat me chaaro taraf bhrashtachaar ka bol bala hai.neta se lekar naukarshaho tak sab bhrasht hai.sarakaari tantr me bhai bhatijaa baad ka bol baalaa hai.agar ham sarkaari tantr ko dekhe to ham payege ki sarakaari tantr me jo log kaam kar rahe hai in logo ki neev hi bhrashtaachaar par rakhi hai.aaj sarakaari tantr me kaam karane wale adhikansh vyakti bhrasht tarike se sarkaari tantr me shaamil huye hai.had to ab yahan tak ho gayi ki ab to sarakaari tantr me jo log samvida me bharti ho rahe hai ve bhi le de kar shaamil ho rahe.ye sambida par kaam karane waale log chahe swaashthya vibhag me ho,manregaa me ho yaa fir uttaar pradesh pahivaahan vibhag me ho.aaj bhrashtaachaar ka rate bhi bad rahaa hai.mai achchhi tarah se jaantaa hu ki pahale hamare papaa jo kaam 50 rupees de kar karwaate the ab vahi kaam hame 500 de kar karwaanaa pad rahaa hai.agarsthiti yahi rahi to hamare bachcho se isi kaam ke liye 5000 rupees dene padage.sarakaar dvara laga 6 vetan ne bhi bhrashtachaar ke rate ko bada diya hai.

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  3. कल सरसरी निगाह से पोस्ट को पढ़ा था लेकिन कमेन्ट नहीं कर सका क्योंकि इससे पहले लोकपाल विधेयक और जन लोकपाल विधेयक के प्रावधानों को समझ लेना चाहता था. अब जब इससे अवगत हो गया हूँ, एक बात समझ में नहीं आती की आखिर इसके लिए किसी को आमरण अनशन पर जाने की ज़रूरत क्यों पड़ी. इसमें लोकपाल विधेयक के कमियों को दूर करते हुए इसे ज्यादा से ज्यादा जनकल्याणकारी बनाने का प्रयास किया गया है. ऐसे में जनकल्याण के इन कथित ठेकेदारों को यह बात समझ में क्यों नहीं आती??????????????????

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  4. आपके ब्लॉग पे आया, दिल को छु देनेवाली शब्दों का इस्तेमाल कियें हैं आप |
    बहुत ही बढ़िया पोस्ट है
    बहुत बहुत धन्यवाद|

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  5. शिवलोक स्नातकोत्तर महाविद्यालय मेहरबान सिंह का पुरवा कानपुर में बोल बोल कर नक़ल करायी जा रही है ...मेहरबान सिंह का पुरवा कानपुर के सुखराम सिंह यादव के कालेज नक़ल के बड़े अड्डे मात्र है.सुखराम सिंह यादव के दर से कोई भी वहा नक़ल पकड़ने नहीं जाता है ... विश्वास न हो तो कापिया मिला कर देख ली जाये ... सब दूध का धुध पानी का पानी हो जायेगा सुखराम सिंह यादव के में ह रबान सिंह का पुरवा कानपुर के सभी कालेजों के टीचर्स के अनुमोदन भी ९० प्रतिशत फर्जी हैं ...स्ववित्त पोषित कालेजों में सबसे भ्रस्त कालेज मेहरबान सिंह का पुरवा कानपुर के कालेज हैं ...सबसे भ्रस्त मालिक सुखराम सिंह यादव है ..

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