अजनबी शहर में अपना शहर याद आया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया
जब देखा गली में बच्चों को खेलते क्रिकेट
फिर सुनी अपने ही शीशे के टूटने की आवाज
अपने बचपन का सुहाना दौर याद आया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया
मिला सब यहाँ जो मिला ना था अब तक
इस शहर ने हर सपने को बनाया हकीकत
हर उडान पे वो पतंग का उडाना याद आया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया
घूमा बहुत मैं और देखी भी बहुत दुनिया
सपनों की नगरी से लगे बहुत से नगर
पर अपने शहर सा कोई भी ना शहर पाया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया
सोचते थे प्यार लोगों से होता है जगह से नही
समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे
उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया
