आज जब मै अपने आस पास नजर दौडाता हू तो देखता हू कि हमारे महापुरुष राष्ट्रीय न हो कर जातीय महापुरुष बन गये है. आखिर ये जहर और पागलपन की फसल हम किसके लिये बो रहे है और कौन इसे काटेगा. डा अम्बेडकर की मेहनत और उनकी ,मेधा को सलाम करता हू किंतु जो जहर वह फैला गये है वह भी केवल बदले के भाव मे बह कर, उसके लिये मेरे मन मे अतीव रोष है. व्यक्ति अपने जीवन काल मे जो करता है उसका मूल्यांकन आने वाली पीढीया करती है. उन्होने धम्म परिवर्तन के समय जो 22 प्रतिज्ञाये करायी थी उससे क्या समाज एक समरस भाव से सयुक्त रह सकता है? डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्मं में परिवर्तन के अवसर पर,15 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों के लिए 22 प्रतिज्ञाएँ निर्धारित कीं.उन्होंने इन शपथों को निर्धारित किया ताकि हिंदू धर्म के बंधनों को पूरी तरह पृथक किया जा सके.इनमे से कुछ प्रतिज्ञाएँ हिंदू मान्यताओं और पद्धतियों की जड़ों पर गहरा आघात करती हैं. प्रसिद्ध 22 प्रतिज्ञाएँ निम्न हैं:
- मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
- मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
- मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
- मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ
- मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ
- मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
- मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा
- मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा
- मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ
- मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा
- मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा
- मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा.
- मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
- मैं चोरी नहीं करूँगा.
- मैं झूठ नहीं बोलूँगा
- मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.
- मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
- मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
- मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ
- मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.
- मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
- मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा.
अब पाठक गण तय करे कि शपथ न 19 क्या घृणा और साम्प्रदायिकता को पोषित नही करता? अवतारो को सिरे से खारिज करने वाले अम्बेडकर को बोधिसत्व बताने वालो पर मुकदमा नही चलाया जाना चाहिये? और महज प्रारूप समिति को देखने वाले अम्बेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता कैसे मान लिया गया
भारतीय संविधान का निर्माता कौन है यदि कोई ज्ञानी पुरुष इस ब्लाग पर आकर इस गुत्थी को सुलझाये तो महान दया होगी. भारतीय संविधान निर्माण हेतु 13 समितियो का गठन किया गया था जो इस प्रकार है
| नियम समिति | डॉ. राजेंद्र प्रसाद (संविधान सभा के अध्यक्ष्) |
| संघ शक्ति समिति | पं जवाहर लाल नेहरू |
| संघ संविधान समिति | पं जवाहर लाल नेहरू |
| प्रांतीय संविधान समिति | सरदार वल्लभ भाई पटेल |
| संचालन समिति | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| प्रारूप समिति | डॉ. भीमराव अम्बेडकर |
| झण्डा समिति | जे. बी. कृपलानी |
| राज्य समिति | पं जवाहर लाल नेहरू |
| परामर्श समिति | सरदार वल्लभ भाई पटेल |
| सर्वोच्च न्यायालय समिति | एस. वारदाचारियार |
| मूल अधिकार उपसमिति | जे. बी. कृपलानी |
| अल्पसंख्यक उपसमिति | एच. सी. मुखर्जी |
अब आप तय करे कि इनमे से क्या किसी व्यक्ति को महज इसलिये संविधान निर्माता कहा जाय कि उससे एक वर्ग विशेष का वोट मिलेगा.
देश ऐसी स्थिति मे है जहा पर असहिस्णुता का पागलपन बात बात मे जबान काटे ले रहा है अनुरोध है एक नागरिक, हिन्दुस्तानी और सच्चे इंसान होने का फर्ज़ निभाये और स्याह सफेद करने का बूता रखे.
जय हिद.