गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

अपना शहर



अजनबी शहर में अपना शहर याद आया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

जब देखा गली में बच्चों को खेलते क्रिकेट  
फिर सुनी अपने ही शीशे के टूटने की आवाज
अपने बचपन का सुहाना दौर याद आया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

मिला सब यहाँ जो मिला ना था अब तक
इस शहर ने हर सपने को बनाया हकीकत
हर उडान पे वो पतंग का उडाना याद आया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

घूमा बहुत मैं और देखी भी बहुत दुनिया
सपनों की नगरी से लगे बहुत से नगर
पर अपने शहर सा  कोई भी ना शहर पाया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

सोचते थे प्यार लोगों से होता है जगह से नही
समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे
उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया



11 टिप्‍पणियां:

  1. रहता हूँ कानपुर में पवन नाम है मेरा
    गिरती है बिजलिया जहा मकान है मेरा
    बहुत खूब भद्रे

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  2. bahur sundar yaade
    रहता हूँ कानपुर में पवन नाम है मेरा
    गिरती है बिजलिया जहा मकान है मेरा
    waaaaaaaaaaah

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  3. अरे भाई चन्द्र ये कट पेस्ट है
    कभी कभी के के मिश्रा प्लेस्मेंतवाले की छाया पद जाती है

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  4. सोचते थे प्यार लोगों से होता है जगह से नही
    समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे
    उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया
    उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

    यही तो बात है ...जब हम किसी जगह से बंध जाते हैं, या हमें कोई बांधने की कोशिश करता है तो ..फिर हम खुद ही उसमें समां जाते हैं ...तो हर गली हर मोड़ याद आते हैं ..बहुत सुंदर ...

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  5. bahut khoobsurt
    mahnat safal hui
    yu hi likhate raho aapko padhana acha lagata hai.

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  6. सोचते थे प्यार लोगों से होता है जगह से नही
    समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे
    उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया
    उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

    सच,यादें बहुत बड़ी पूँजी होती हैं इन्सान के जीवन की.
    बहुत सुन्दर कविता है आपकी.
    plz. visit my blog: kunwarkusumesh.blogspot.com

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  7. पलाश जी सुन्दर भाव सुन्दर कविता अपनी जमी अपना शहर होता ही ऐसा है जब हम दूर हो जाते है तो और प्यारा
    शुक्ल भ्रमर ५

    घूमा बहुत मैं और देखी भी बहुत दुनिया
    सपनों की नगरी से लगे बहुत से नगर
    पर अपने शहर सा कोई भी ना शहर पाया
    उसकी हर गली हर एक मोड याद आया

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  8. जिसको देखा करते थे आसमान में चमकते हुए
    आज उसी मां को देखते है सरे राह तडपते हुए
    रोती थी वो बिलखती थी वो सारी रात
    पर पहेले नहीं थे उसके इसे हालात
    अपनी इज्ज़त अपने घर में ही तो है ऐसा कहेते थे वो
    लेकिन अपनी माँ को नीलाम घर पर ही तो करते थे वो
    इन चंद नेताओ ने कर दिया अपनी माँ का सौदा
    क्या कभी कोई बेटा करता था ऐसा IS KAVITA KO PURA PADEY KANPURASHISH.BLOGSPOT.COM PAR BAKI AAP SABHI KA SHAYOG MILTA RAHEY AAP LOG HAMEY BHI PANEY SATH JODEY RAKHIYE

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