गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

थोड़ी सी नींद रक्खी है सिरहाने:ईशा त्रिपाठी


कानपुर में प्रतिभाओं की कमी नही है बस उन्हें ढूढकर तराशना है और सामने लाना है. KBA इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है. इसी सिलसिले में मै आपलोगों को  ईशा त्रिपाठी से परिचय करना चाहता हूँ. यह बच्ची अभी हाई स्कूल में पढ़ती है. कल मैने अनायास इसकी कविताएं देखी तो एक बारगी ताज्जुब हुआ कि इतनी छोटी उम्र में इतनी परिपक्व रचना. मैंने तुरंत इसे एक रचनाकार के तौर पर KBA पर आमंत्रित किया. इसकी नैसर्गिक  काव्य  प्रतिभा से आप भी रूबरू होइए और आशीष प्रदान करे.

थोड़ी सी नींद रक्खी है सिरहाने
अभी न ही रात को और न ही नींद को
आँखों में भरने का मन है
अभी कुछ देर और अँधेरा ताकने का मन है |
रात का सन्नाटा कानों में गूंजता है
साँसों का आना-जाना भी शोर सा लगता है |
कमरे के अंधकार में
कहीं दरारों से झांकती है चांदनी
और उन्हीं रास्तों से प्रवेश पाती है
ठंडी-ठंडी हवा भी |
आवाज़ देता रहता
दीवार पर लटका समय
कानों में पड़ती रहती
झींगुर की झिन्झिन हर समय |
बीच-बीच में दूर से
न जाने किस ओर से
आती है ऐसी ध्वनि
की कोइ गाडी जाए अनमनी |
टिप-टिप सुनायी देती है
रिसती हुई धाराओं की |
हूकें सुनायी देतीं हैं,
जागे हुए चौपायों की  |
साँसें थीं गहरी हो चुकी
छायाएं गहरी हो चलीं
सुर-ताल सरे रात के
सुनायी देने कम लगे
निद्रा वहीं थी सामने
मनो लगाने को गले
पल-पल अँधेरा देखती
आँखें थी मेरी थक गयीं
पलकों की चिक भी गिर गयी
और नींद ने कब गोद में सिर रख लिया मालूम नहीं |
....ईशा(अनुसूईया)

12 टिप्‍पणियां:

  1. वाह
    अव्वल दर्जे की रचना
    बधाई

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  2. its feel very proud that "ISHA" is associaed wih "KBA".
    really you are saying right that kanpur have lots and lots such a shining pearls .
    i wish for her great future .
    and i am happy that KBA have all the three generation "anoop ji aur rekha ji jaise experienced personalities ", pawan ji jiase juzaru wyakti aur hamari ISHA and Harsh kant jaaise talented students .

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  3. \इतनी छोटी सी उम्र मे इतना बढिया प्र्यास काबिले तारीफ है। ईशा जी को बधाई एवं आशीर्वाद।

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  4. "वाह ईशा की कविता पढ़कर मन प्रफुल्लित हुआ . सचमुच कानपुर में साहित्यिक प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं हैयह टिप्पणी आशीष राय जी ने की है"
    कुछ तकनीकी कारणों से पोस्ट नही हो पाईए तो उन्होंने मेल के द्वारा भेजा है

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  5. बहुत ही सुंदर. ईशा की और भी कविताएँ पेश की जाएं. इस कविता को पढके खोया हुआ समय याद आ गया.

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  6. आती है ऐसी ध्वनि
    की कोइ गाडी जाए अनमनी |
    टिप-टिप सुनायी देती है
    पल-पल अँधेरा देखती
    आँखें थी मेरी थक गयीं
    पलकों की चिक भी गिर गयी
    और नींद ने कब गोद में सिर रख लिया मालूम नहीं
    this is poem or painting?

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  7. ईशा अपने एहसासों को सुन्दर ढंग से व्यक्त किया है आगे भी इन एहसासों को बनाये रखना
    witing for next one

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  8. बहुत ही सुंदर है ईशा की कविताएँ ,मन प्रफुल्लित हुआ

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  9. इस सुन्दर कविता के लिए धन्यवाद , औ इतनी सुन्दर रचना के लिए बधाई. आज ही भाई ने सुभद्रा सिंह चौहान कि कविता मुझे भेजी थी और मैं सोच रहा था कि काश हिदी जगत में अब भी ऐसे लोग होते, और आपको पाया. बहुत सुन्दर.

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