मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

इंतजार

ये कविता  मेरे द्वारा मेरे प्रेम को समर्पित .......

आँखे  है  पथराई  सी ,
एक  टक नजर  लगाये ,
लौट  के  आजा  तू ,
कोई  इंतजार  करता  है .

भूख  प्यास  सब   तज कर ,
 मन  में  अलख  जगाये ,
लौट  के  आजा  तू  ,
कोई  इंतजार  करता  है .

सीता  के  करुण रुदन  की ,
शबरी   के  चित दर्शन  की  ,
कठिन तपस्या मीरा  की ,
 इन  सब  की  याद  दिलाये ,
लौट  के  आजा  तू ,
 कोई  इंतजार  करता  है .

 अब  एक पल   न  देर  करो ,
 ये  धैर्य  के  पर्वत  टूट  रहे ,
आँखों से अश्रु निकलते है ,
और  झरने से है फूट रहे .

तुझको पाने   की  आस  लगाये ,
कोई  इंतजार  करता  है .

लौट  के  आजा ,कोई ....
लौट  के  आजा  तू ,
 कोई  इंतजार  करता  है . 
                                         " अमन  मिश्र "


                    note: चित्र गूगल से साभार

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