ये दास्तान मेरे एक प्रिय मित्र की है जो छत्रपति शाहू जी महाराज से सम्बध्द एक निजी महाविद्यालय में अध्यापन का कार्य करते है.मेरे इन मित्र का नाम है आशीष कुमार .ये विगत कई वर्षो से एक महाविद्यालय में अनुमोदित टीचर के रूप में वनस्पति विज्ञान पढ़ा रहे है .इनके परिवार में इनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे है और ये दोनों बच्चे लड़के है इस तरह से इनके परिवार में कुल ४ सदस्य है .इनके बड़े बेटे की उम्र लगभग १२ साल की है और छोटे बेटे की उम्र लगभग ८ साल की है .ये महाशय जिस निजी महाविद्यालय में पड़ते है उस महाविद्यालय के द्वारा इनको ६ हजार मासिक का वेतन दिया जाता है.इनका छोटा बेटा कक्षा २ में एक स्कूल में पड़ रहा है और इनका बड़ा बेटा किसी समय एक स्कूल में कक्षा ५ में पड़ता था पर अब नही पड़ता है .आज इनका बड़ा बेटा मानसिक रोग का शिकार हो गया है जिसका विगत कुछ महीनो से एक मनो चिकित्सक के पास इलाज चल रहा है.पैसे के आभाव में ये अपने बच्चे का इजाज ठीक प्रकार से नहीं करवा पा रहे है.विगत कुछ महीनो से इनको जो महाविद्यालय वेतन मिलता है वह ये अपने बच्चे के इलाज पर खर्च कर देते है और जो थोड़ा बहुत पैसा बच जाता है उस से ये अपने परिवार का भरण पोषण करते है.नातिजान इनको आज काल दो वक्त की रोजी रोटी की जुगाड़ के किये जगह जगह हाथ पैर मारने पड़ते है फिर भी इनको दोनों वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है कभी कभी तो ये नौबत रहती है की इनके परिवार को दोनों वक्त भूखा रहना पड़ता है.ये कहानी केवल एक आशीष कुमार की नहीं है अपितु इस विश्वविद्यालय में निजी महाविद्यालय के लगभग सभी टीचर की है.निजी महाविद्यालय में चल रही नक़ल से इन महाविद्यालय के टीचर जो कुछ पहले ट्यूशन से कमा लेते थे इस नक़ल ने तो अब उनसे वो भी छीन लिया है .आज इन निजी महाविद्यालय के टीचर की हालत ये है की अगर ये मामूली रूप से बीमार भी हो जाये तो ये अपना इलाज केवल सरकारी अस्पताल में और सरकारी दवा से ही करा पाते है अगर डॉक्टर ने बाहर की दवा पर्चे में लिख दी है तो ये उसे खरीदने में असमर्थ है.आज निजी महाविद्यालय के शिक्षक पैसे के अभाव में बदहाल जीवन जी रहे है.सच बात तो यह है की शासन भी मौन रूप से ये सब कुछ देख रहा है.
कानपुर मात्र उद्योगों से ही सम्बंधित नहीं है वरन यह अपने में विविधता के समस्त पहलुओ को समेटे हुए है. यह मानचेस्टर ही नहीं बल्कि मिनी हिन्दुस्तान है जिसमे उच्चकोटि के वैज्ञानिक, साहित्यकार, शिक्षाविद राजनेता, खिलाड़ी, उत्पाद, ऐतिहासिकता,भावनाए इत्यादि सम्मिलित है. कानपुर ब्लोगर्स असोसिएसन कानपुर के गर्भनाल से जुड़े इन तथ्यों को उकेरने सँवारने पर प्रतिबद्धता व्यक्त करता है इसलिए यह निदर्शन की बजाय समग्र के प्रति समर्पित है.
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सोमवार, 18 अप्रैल 2011
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