.प्रो सहगल ने २६ मार्च को रूरा स्थित श्रीकृष्ण जनका देवी महाविद्यालय में खुद जाकर हो रही सामूहिक नक़ल को पकड़ा था.
इसी प्रबंधक का एक महाविद्यालय दिल्बल मंगलपुर में है जिसका भी नाम श्री कृष्ण जनका देवी महाविद्यालय है. यहाँ पर नक़ल पकड़ने के चक्कर में (अपुष्ट खबरों की माने तो दस्तों ने पचास हजार रूपये मांगे थे.) उड़नदस्ते की जमकर थप्पड़ों और जूतों से पिटाई की गयी थी.
प्रो सहगल फिर वहा गए थे.
एक ही प्रबंध तंत्र के दोनों कालेजों में धड़ल्ले से सामूहिक नक़ल प्रक्रिया चल रही है जिसे सबूत के तौर पर कुलपति ने स्वयं देखा किन्तु आज की तारिख में दोनों महाविद्यालयों में परीक्षाये पूर्ववत चल रही है.यही हाल और भी महाविद्यालयों का है.
ऐसा क्यों आखिर ऐसा क्यों है.क्या कुलपति महोदय बताने का कष्ट करेगे.
इन कालेजो को डिबार क्यों नही किया जाता अगर नही किया जाता है तो छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति सहगल जी नाकामी/ढोंग और कालेजो के प्रबंधकों की मनमानी या फिर दोनों की सांठ गाँठ तकरीबन स्पष्ट हो जाता है

