corruption in csjm university लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
corruption in csjm university लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 10 अप्रैल 2011

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति सहगल जी नाकामी/ढोंग और कालेजो के प्रबंधकों की मनमानी आखिर सच क्या है?

.प्रो सहगल ने २६ मार्च को रूरा स्थित श्रीकृष्ण जनका देवी महाविद्यालय में खुद जाकर हो रही  सामूहिक नक़ल को पकड़ा था.
(कुलपति महोदय चेकिंग के दौरान)
इसी प्रबंधक का एक महाविद्यालय दिल्बल मंगलपुर में है जिसका भी नाम श्री कृष्ण जनका देवी महाविद्यालय है. यहाँ पर नक़ल पकड़ने के चक्कर में (अपुष्ट खबरों की माने तो दस्तों ने पचास हजार रूपये मांगे थे.) उड़नदस्ते की जमकर थप्पड़ों और जूतों से पिटाई की गयी थी.

 प्रो सहगल फिर वहा गए थे. 
एक ही प्रबंध तंत्र के दोनों कालेजों में धड़ल्ले से सामूहिक नक़ल प्रक्रिया चल रही है जिसे सबूत के तौर पर कुलपति ने स्वयं देखा किन्तु आज की तारिख में दोनों महाविद्यालयों में परीक्षाये पूर्ववत चल रही है.यही हाल और भी महाविद्यालयों का है.
ऐसा क्यों आखिर ऐसा क्यों है.क्या कुलपति महोदय बताने का कष्ट करेगे. 
इन कालेजो को डिबार क्यों नही किया जाता अगर नही किया जाता है तो छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति सहगल जी नाकामी/ढोंग और कालेजो के प्रबंधकों की मनमानी  या फिर दोनों की सांठ गाँठ तकरीबन स्पष्ट हो जाता  है

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

कानपुर ब्लागर्स असोसिएसन की गूँज से सहमा सी एस जे एम् यू विश्वविद्यालय और परीक्षा व्यवस्था में सुधार

सर्वप्रथम मै बधाई देता हूँ प्रो पवन मिश्र जी और राजेश विश्नोई जी को जिन्होंने गुंडों मवालियों की धमकियों की परवाह  किये बिना निर्भीकता के साथ सी एस जी एम् विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों को उजागर किया.यूनिवर्सिटी की परीक्षाये २५ मार्च से प्रारंभ हुयी थी और २६ मार्च के अख़बार में  नक़ल मुक्त परीक्षा के दावे किये गए थे जबकि वास्तविकता ठीक इसके उलट थी. पहले से ज्यादा नक़ल हो रही थी और भी तमाम विसंगतिया व्याप्त थी. इस मुद्दे को के बी ए ने गंभीरता से लेते हुए इसके विरुद्ध अभियान शुरू किया ३१ मार्च को लिखी पोस्ट पर मीडिया से लेकर प्रशासन में हडकंप मच गया. राजेश जी को लगातार धमकिया व प्रलोभन दिया गया लेकिन वह जरा भी विचलित नही हुए पवन मिश्र जी ने कानपुर में लोगो को गोलबंद करके (इस क्रम में वी डी पाण्डेय का नाम उल्लेखनीय है ) लड़ाई  को और धारदार बनाया. नतीजा सामने आ गया. विश्वविद्यालय सही ट्रैक  पर आने लगा.उड़नदस्तो की वसूली सार्वजनिक होने से इन दस्तों की पिटाई  होने लगी  इस चक्कर में उड़नदस्ते में शामिल वी पी सिंह ,डॉ आलोक डॉ अनिल कुमार की थप्पड़ो से पिटाई की गयी.(देखें अमर उजाला आज दैनिक जागरण ९ अप्रैल ). कुलपति के बीचबचाव के बाद स्थिति सम्भली.अब इस ब्लॉग का दूसरा असर देखिये वी जी एम् महाविद्यालय दिबियापुर जिन छात्रो को जांच पत्र नही दिए गए थे उनसे कहा गया था की कापी नंबर कागज पर लिख ले,उन छात्रो को ७ अप्रिल को जांच पत्र दे दिए गए.
भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध जारी रहेगा और जीत सत्य की होगी
कानपुर ब्लागर्स असोसिएसन के इस जज्बे और हिम्मत को सलाम