समाज अवधारणात्मक संकट के दौर से गुजर रहा है .अवधारणात्मक संकट का तात्पर्य यह है कि आज व्यक्ति मुलभुत संदर्भो को दो अथों में परिभाषित करने का आदी हो गया है .अपने लिया कुछ ओर अन्यो के लिए कुछ ओर स्वयम कर्तव्यविमुख हो कर दुसरो को कर्तव्य का उपदेश देना .अपने बच्चो तथा परिवार के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाला व्यक्ति रास्ट्र ओर समाज के लिए अब सोचता ही नही .साधन ओर साध्य का विवेक ही समाप्त हो गया है .एसी स्थिति में हमे केवल साध्य दिखाई दे रहा है साधन पवित्र है या अपवित्र इसकी पहचान विलुप्त होती जा रही है साध्य कि पवित्रता का विलोप ही अपराधी करन का कारन है एस प्रकार अपराधी करण ओर अवधारणात्मक संकट समाज में उथल पुथल क़ी स्थिति निर्मित कर देते है एसी स्थिति में जीवन मरण का प्रश्न पैदा जाता है .असितत्व रक्षा का सवाल पैदा हो जाता है ओर जहा नेतिकता का अंत होगा वही से अनेतिक कार्यो का आरंभ होगा .आज अगर हमे समाज में बढ़ाते अपराधी करण पर अंकुश लगाना है तो हमे परम्परिक भारतीय सामाजिक मूल्यों क़ी पुन्: स्थापना करनी होगी .
कानपुर मात्र उद्योगों से ही सम्बंधित नहीं है वरन यह अपने में विविधता के समस्त पहलुओ को समेटे हुए है. यह मानचेस्टर ही नहीं बल्कि मिनी हिन्दुस्तान है जिसमे उच्चकोटि के वैज्ञानिक, साहित्यकार, शिक्षाविद राजनेता, खिलाड़ी, उत्पाद, ऐतिहासिकता,भावनाए इत्यादि सम्मिलित है. कानपुर ब्लोगर्स असोसिएसन कानपुर के गर्भनाल से जुड़े इन तथ्यों को उकेरने सँवारने पर प्रतिबद्धता व्यक्त करता है इसलिए यह निदर्शन की बजाय समग्र के प्रति समर्पित है.
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शुक्रवार, 25 मार्च 2011
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