सोमवार, 25 जून 2012

कभी तुम मिलो जो...










कभी तुम मिलो कभी हम मुलाकातो
का ये सिलसिला यू ही चलता रहे

यू ही मुसकराते रहो तुम और
ये हसीन पल का सफर चलता रहे

शाम हो तो ठंडी हवा चले तुम्हारी
महक यू ही महसूस करते रहे

रात हो तो चान्दनी का इंतज़ार ना रहे
सुबह हो तो रोशनी की नज़र ना रहे

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें