रविवार, 16 जनवरी 2011

काफिर अनवर जमाल से खबरदार

वैसे तो रीडर हूँ पर ये समय है कि चुप नहीं रहा जाता जब समाज में कीड़े आ गए है तो उनपर मैलाथियान का छिडकाव जरूरी हो जाता है.

"मिरा कातिल तिरे बीच है जरा नज़र उठा के तो देख
अजीज समझता है उसके खंज़र पे  नाम लिखा  तो देख"
  
ये पंक्तिया अनवर जमाल पर बिलकुल सटीक बैठती है.  थोथा चना बाजे घना की तर्ज़ पर यह बहुत वाचाल   अपने मुह मिया मिट्ठू है. सभी हिन्दू मुसलमान  भाइयो बहनों को आगाह है कि  यह वही शैतान है जिसकी मीठी मीठी बातो में आकर आदम  और हव्वा को जन्नत से बहिस्कृत होना पड़ा. आज यह अभिशप्त एक बार फिर जन्नत से आदम की औलादों  को आपस में लड़वाकर  फिर उन्हें जन्नत  से दोज़ख में गिराने क़ा कुत्सित षड्यंत्र रच रहा है.
अपनी प्यारी धरती पर हमेशा महात्माओं पीरो ने मुहब्बत क़ा सन्देश दिया लेकिन समय समय पर शैतान भेष बदल कर अमन में जहर घोलने से बाज़ नहीं आया. अब यह फिर मीठी बातो से जहर फैला रहा है.
इस  काफिर की अच्छे से पहचान कर लीजिये आप लोग नहीं तो दिल बटते रहेगे  लाशें गिरेगी और उनके ऊपर ये रक्तपिपासु   शैतान रक्तपान करके  अट्टहास करता रहेगा.
हकीकत को जरूरत है न मंदिर की न मस्जिद की
नमाज़े हक अदा होगी खुले मैदान में साकी.

14 टिप्‍पणियां:

  1. कानपुर से अच्छी तरह वाकिफ हूँ ...वहां की तासीर से भी. ब्राह्मण हूँ ....पर धर्मांध नहीं ...बड़ी विनम्रता से निवेदन करना चाहूंगा अनवर ज़माल हों या कोई और ....किसी के भी बारे में इस तरह की भाषा का प्रयोग उचित नहीं है ...उनसे हर किसी का सहमत होना अनिवार्य नहीं है ...और न उनको जानना ज़रूरी है ...यदि विचार वैषम्य है तो उनके ब्लॉग पर मत जाइए .....वे आप पर टिप्पणी करते हैं तो मोडीरेशन लागू कर दीजिये ...बात ख़त्म......नफरत को नफ़रत से ख़त्म नहीं किया जा सकता....शेरों वाली बात तो तब है जब आप प्रेम से किसी को अपना बना लें ...ध्यान रखियेगा ....दुश्मन बनाना सरल है पर दुश्मन को दोस्त बनाना हर किसी के बस का नहीं.
    पिछले दिनों बिठूर गया था ...गंगा की दुर्दशा देख कर दुःख हुआ ...बाद में आपने ब्लॉग पर भी लिखा ...वहां की एक स्वयं सेवी संस्था को एक आवेदन भी देकर आया था ...अभी तक कोई ज़वाब नहीं आया. मैं छत्तीसगढ़ में हूँ ... यदि आप कर सकें तो अपनी शक्ति वहां लगाएं .....मेरे ब्लॉग पर आकर ज़रा बिठूर का नज़ारा आप भी देखने की कृपा करें .....ब्लॉग है - bastar ki abhivyakti

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  2. भाई चन्द्र मेरी जानकारी के अनुसार तो आदम हव्‍वा के औलादें जन्‍नत में नहीं हुई थीं वैसे और बातें आपकी काफी ठीक हैं इस का ब्‍लाग vedquran.blogspot.com मैंने देखा हमें भागना नहीं इसकी बातों का जवाब ज्ञान से देना चाहिए, केवल काफिर कह देना तो हमारी अज्ञानता ही प्रदर्शित करता है

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  3. अनवर भाई एक नेक इन्सान हैं. नाम से ही लगता हैं कि ये एक मुसलमान हैं मगर पूरी तरह से ये हिन्दू और एक अच्छे भारतीय हैं.

    इसलिए इनके बारे में गलत फहमी ना पैदा करे. वो अलग बात हैं कि अनवर भाई गलत फहमी के शिकार हैं.

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  4. किसी सच्चे मुसलमान को काफ़िर कहना बहुत अफ़्सोसनाक है चन्द्र जी। डॉ. साहब ऎसे नहीं हैं जैसा कि आप सोच रहे हैं। जो वेद के साथ कुरआन की बात करे वो क्या काफ़िर होगा ? Never ever.

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  6. ऊपर की मैंने टिप्पड़िया पढ़ी , अफ़सोस है की बिना जानकारी के जमाल जी सही घोषित किये जा रहे है , मैंने जमाल जी के ब्लॉग पर उन के कुप्रचारो का जवाब दिया है पर वो कभी न सुधरने वाले व्यक्ति है .
    मैं भी मुस्लिम धर्म के बारे में लेख लिख सकता हू और इन की ही तरह बहुत कुछ सिद्ध कर सकता हू पर मैं इन की तरह मूर्ख नही हू . हिन्दू धर्म की ये किस प्रकार इस्लामिक व्याख्या कर रहे है और सही जवाब मिलने पर कैसे तिलमिलाते है ये देखिये
    http://vedquran.blogspot.com/2010/09/life-style-of-sri-krishna-anwer-jamal.html

    जब जमाल जी को बताया गया की श्री कृष्ण ने कहा है वे ईश्वर है तो वो कैसे गीता पर क्षेपक का आरोप लगा कर हिन्दू भावनाओ को ठेस पंहुचा रहे है और अपना कुतर्क सिद्ध करने की कोसिस कर रहे है और यहाँ एक जनाब कहते है की वेद कुरान की बात करने वाला गलत नही हो सकता . इस से सतही टिप्पड़ी नही हो सकती .
    किसी को भी हमारी भावनाओ को ठेस पहने का अधिकार नही .
    आप अपने धर्म की अच्छाई बताने की बजाये दूसरे की बुराई बता कर उस का उपाय अपना धर्म बताये क्या ये उचित है ??????????????????????????????

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  7. जमाल जी हिन्दू धर्म का अध्ययन तो करते हैं पर मुसलमानी मस्तिष्क से ना कि एक साफ मन से।इसलिए ये किसी विषय को सही समझने के बजाय गलत समझ बैठते हैं।इसमें कोई शक नहीं कि इनका मस्तिष्क भी अन्य मुसलमानों की तरह ही है।ये भी निष्पक्ष नहीं हैं।फिर भी चाहे कारण जो भी हो,भले ही ये हिन्दू धर्म का अध्ययन हिंदुओं की बुराई ढूँढने के लिए करते हो या फिर जानने की उत्सुकता से,लेकिन अन्य मुसलमानों से ये कुछ कम कट्टर हैं॥कुछ तो लचीलापन है इनमें जो कि और मुसलमानों में नहीं है॥इनसे नफरत करने की बजाय इन्हें प्रेम से समझा सकते हैं हम।प्रेम तो हिंदुओं की पहचान है।नफरत करके अपनी पहचान क्यों खोएँ हम॥

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  8. एक ब्लोगर होने के नाते और इस ब्लॉग के सदस्य होने के नाते मैं भी यही चाहूंगी जो कौशलेन्द्र जी लिख रहे हैं. मैं उनके विचारों से पूरी तरह से सहमत हूँ. ये ब्लॉग किसी पर नाम लेकर आक्षेप करने के लिए नहीं बनाया गया है. इसके निर्माता स्वस्थ मानसिकता और परंपरा के स्वामी भी हैं. हम किसी भी ब्लॉग का सञ्चालन अपनी रूचि और उद्देश्य के लिए करते हैं और उसको पूरा करने का पूर्ण प्रयास भी करते हैं. इस लिए भविष्य में व्यक्तिगत आक्षेप के लिए जो ऐसा करना चाहें वे अपने व्यक्तिगत ब्लॉग का प्रयोग कर सकते हैं. दूसरों पर कीचड उछालने में बड़ाई नहीं है बल्कि उस कीचड से खुद को बचाते हुए प्रतिकार करना उचित है.

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  9. पिछले कुछ दिनों से मैं काफी व्यस्त थी , आज ही अपनी थकान भरी यात्रा से लौटी तो बस ब्लाग की दुनिया में आ गयी , सोचा कुछ अच्छा पढ कुछ थकान दूर की जाय । मगर आज मुझे बहद अफसोस हुआ ।
    हमने कानपुर ब्लागर्स इस उद्देश्य से बिल्कुल भी नही बनाया था ।
    जिस व्यक्ति विशेष के बारे में लिखा गया हम उनको बिल्कुल भी पढना नही चाहते(ना उनकी तारीफ और ना ही बुराई) ब्लाग जगत बहुत बडा है , सबके अपने अपने विचार है ,मै नही समझती कि यहाँ कोई मूर्ख या नासमझ है जिन्हे आगाह किया जाय ।
    और कानपुर शहर एक बहुत ही उदार वादी शहर हमेशा से रहा है , गंगा के पावन जल ने सभी को मोक्ष दिया है । हम रेखा जी कौशलेन्द्र जी की बातों से पूरी तरह सहमत है । हाँ एक बात और जरूर कहना चाहती हूँ

    कानपुर का गौरव दुनिया में हो , सभी कानपुर को जाने , उसके इतिहास को जाने , यही हमारा उद्देश्य है ।

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  10. राकेश जी
    आपको संयत होकर अपने विचार लिखने चाहिए था.कानपुर ब्लाग असोसिएसन इस तरह के पोस्ट के लिए बिलकुल नहीं है आप पर मैंने विश्वास किया और पोस्ट देखी नहीं चूंकि ये आपकी पहली गलती है उम्मीद करता हूँ कि आखिरी होनी चाहिए इसलिए डिलीट नहीं कर रहा हूँ ताकि आइन्दा भविष्य में आप इससे सबक ले सके. आपको नहीं मालूम कि आपने क्या किया है अनवर जमाल से मेरा वैचारिक द्वन्द है वो अपने धरम के प्रचार में लगे है जिसका मै समर्थन करता हूँ किन्तु उनके तरीके और सोच क़ा घोर विरोधी हूँ लेकिन मै नहीं चाहता कि उनका इस तरीके से अपमान सार्वजनिक मंच से हो.
    आप मेरे भले ही कितने ज्यादा प्रशंसक हो लेकिन मै कानपुर ब्लॉग असोसिएसन पर ऐसी हरकत बत्दाष्ट नहीं करूंगा. आपकी अगली गलती पर आपको हमेशा के लिए असोसिएसन के लेखक लिस्ट से निकाल दिया जाएगा.
    आशा है आपकी सुन्दर पोस्टो से यह मंच सुसज्जित हो इसी उम्मीद के साथ......

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  11. sahi baat ...... galat munch ...... se ......

    gyani hain .... bilkul nahi ......
    panditya hai... koot-koot bhara hua .....
    kattar hain ... kattai nahi.....
    sahishnu hain ... bhasha se bhavon se nahi ....

    ye khud bhi aur log bhi inke bare kanfuse hain .

    luck....wale unki haan me haan milate hain....
    kanp....wale apse asahmati darsate hain.......

    yahi fark hai sach aur jhoot me.....yahi phar hai gyani aur panditya me.....

    unhe itna waqt do itna kah lene do ..... ke jab har koi unse ashmat ho to o kah na sake .... hame poora mouka nahi mila .......

    is association se kabhi is tarh ki vaykitgat ...aur o bhi akshep-purn post na ho .....

    sadar

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  12. आपलोगों को मेरी बातो से ठेस पहुची इसके लिए मै क्षमा प्रार्थी हूँ
    मेरी नादानियो को माफ़ करना पवन भैया
    अभी सीख रहा हूँ
    कि कैसे लाग लपेट कर बात करनी चाहिए
    अभी अनुभव हीनता है
    आप और पलाश रेखा जी सभी से मै पुनः माफी मांगता हूँ और यदि दंड देना चाहे तो ब्लॉग से निकाल दीजिये क्षमा करना कहते है तो एक मौका और दीजियेगा.
    आपलोगों का
    ..................राकेश

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  13. मैं आज एक ब्लॉग 'ब्लॉग की ख़बरों' पर गया था, पर वहाँ जाकर परेशान ही हुआ. और टीप द्वारा में अपनी समस्या भी बताई. पर डॉ अनवर जमाल के कान पर सुई भी नहीं रेंगी.


    टीप :
    आदरनीय डॉ साहेब,
    वैसे तो आपके कई ब्लॉग है, पर आपके ब्लॉग “ब्लॉग की खबरें” पर इसी पोस्ट में एक टीप द्वारा में अपनी बात रखना चाहता हूँ,
    LIKE कॉलम के अन्तरगत कुछ पोस्ट जो कई महीनो से चमक रही हैं जैसेकि
    धर्म के नाम पर ‘सेक्स’ का खेल
    सम्भोग रहस्य
    यहाँ पर इस पोस्टों के साथ संबद्ध चित्र को देख कर ऐसा लगता है मानो इन ब्लोग्गरों ने कुछ इस टाइप का लेखन किया हो. पर ऐसा कुछ भीं नहीं है. अत: आपसे ये सादर अनुरोध है की उक्त पोस्टों को अपने ब्लॉग से डिलीट कर देवें.
    इस विषय में आपसे पहले भी टीप द्वारा सूचित किया है, पर आपने बजाये कुछ कदम उठाने के मेरी टीप ही डिलीट कर दी. एक अनुभवी और विद्वान ब्लोग्गोर है, अत: अपेक्षा करता हूँ कि तुरंत ऐसी पोस्ट डिलीट कर आप स्वस्थ ब्लॉग्गिंग को मज़बूत करेंगे.
    सादर
    दीपक बाबा

    पहली बार आपके मुताखिब हुआ हूँ, शायद आप मेरी मनोभावना को समझेंगे व् कुछ मज़बूत कदम उठाएंगे
    भवदीय
    दीपक डुडेजा

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