मंगलवार, 11 जून 2013

ओ मेरी "परछाई"

घर से दूर .....
अपनों से दूर.....
"तुम" से दूर ....होकर
मैंने ये जाना है कि ........ 
जीना कितना कठिन है .....
और मरना कितना आसान ..... 

ओ मेरी "परछाई"....
तेरे बिना मै भटक रहा हूँ....
प्रेत बनकर अंधेरी 
गलियों में ......




शनिवार, 8 जून 2013

ये कैसा भारत निर्माण ...


मूल्यों के गिरते स्तर पर ,
ये कैसा भारत निर्माण ...

नैतिकता के शव पे खड़ा ,
आज का बदलता हिंदुस्तान ....

ये कैसा भारत निर्माण ...

कौन सी माता ,
किसके बच्चे...
सब झूठे है ,फिर भी सच्चे ..

चौराहों  पे बिकता आदर्श ,
 झूठे छेड़ते सत्य  की तान ...

घोटालो की खुली मंडी,
लज्जा भी हो रही हैरान .....

ये कैसा भारत निर्माण ....
.ये कैसा भारत निर्माण .....

गंगा है मैली ,मैला
यमुना का आँचल ..
ये  सुनहरा है आज ,
तो  क्या होगा अपना  कल ?

खड़ा किसान रो रहा ,
बाकि नहीं देह में जान ..
ये कैसी विकास की कीमत ,
खो रहे है  अपना मान..

बस हो रहा भारत निर्माण ...
ये कैसा  भारत निर्माण ....

शुक्रवार, 31 मई 2013

अबाधित धार हो प्रभु स्नेह की तुम : तारिणी

 









अज अनन्त निर्विकार
प्राणनाथ करुनागार
निरुद्वेल निरुद्वेग
निश्चल सरोवर चेतसः।
अन्तरज्ञ सर्वज्ञ
शब्द सर्वथा निरर्थ
जानो सब नाथ
करो कृपा काश्यप पर।

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अबाधित धार हो प्रभु स्नेह की तुम
ह्रदय के केंद्र में स्थित शुभ्र आसन ।
मनस् की शुद्धता के स्रोत हो हे!
प्राण का उल्लास हो!
सर्वथा शरण लो प्रभु,
संशय सभी हे! दूर कर दो।
निरंतर तव चरण रत रहे जन और
स्नेह जल से आप्लावित।

सोमवार, 27 मई 2013

सफ़र

तम से  घिरता ,जड़ता में बंधता ..
पथ का राही मै ,राहों से लड़ता ..
खुद को ही जला जला मै ,दीपक सा जल जाता हु ..
बस आगे बढता जाता हु ,बस आगे बढ़ता  जाता हु ...

नित नए भ्रमो की भटकन ,
राहों के वो नए नए रंग ,
इन सभी पाशों से उलझा ..
खुद ही तलवार उठता हु ..
बस आगे बढता जाता हु बस आगे बढता जाता हु ...

नित नयी वेला की आशा ,
समय चक्र का खेल तमाशा ,
रखते हुए ह्रदय मोम सा ,
"अमन "पत्थर का बन जाता हु ....
बस आगे बढता जाता हु बस आगे बढता जाता हु ...


            " अमन मिश्र "

note: pic from other blog with a lots of thank you....