कानपुर मात्र उद्योगों से ही सम्बंधित नहीं है वरन यह अपने में विविधता के समस्त पहलुओ को समेटे हुए है. यह मानचेस्टर ही नहीं बल्कि मिनी हिन्दुस्तान है जिसमे उच्चकोटि के वैज्ञानिक, साहित्यकार, शिक्षाविद राजनेता, खिलाड़ी, उत्पाद, ऐतिहासिकता,भावनाए इत्यादि सम्मिलित है. कानपुर ब्लोगर्स असोसिएसन कानपुर के गर्भनाल से जुड़े इन तथ्यों को उकेरने सँवारने पर प्रतिबद्धता व्यक्त करता है इसलिए यह निदर्शन की बजाय समग्र के प्रति समर्पित है.
रविवार, 14 अक्टूबर 2012
मंगलवार, 18 सितंबर 2012
कब तक हम शांत हो
कब तक ऑंखें ही नाम करके हम शांत हो
क्या हमे जीने का हक नहीं है यहाँ
क्यूँ नहीं सुन रहा कोई आवाज को
बोलने का हक हमे क्या नहीं है यहाँ
कल पढ़ा था हर कोई यहाँ आजाद है
था जहाँ ये लिखा वो संविधान है कहाँ
बोलने की सजा अब तो मौत मिल रही
न्यायदाता धरा से गए अब कहाँ
दर्द माँ के शहीदों का वो जाने क्या
जिसने गीदड ही पैदा किये है यहाँ
लाल अपना जो खोते तो वो जानते
लाल खोके माँ कैसे है ज़िंदा यहाँ
क्या हमे जीने का हक नहीं है यहाँ
क्यूँ नहीं सुन रहा कोई आवाज को
बोलने का हक हमे क्या नहीं है यहाँ
कल पढ़ा था हर कोई यहाँ आजाद है
था जहाँ ये लिखा वो संविधान है कहाँ
बोलने की सजा अब तो मौत मिल रही
न्यायदाता धरा से गए अब कहाँ
दर्द माँ के शहीदों का वो जाने क्या
जिसने गीदड ही पैदा किये है यहाँ
लाल अपना जो खोते तो वो जानते
लाल खोके माँ कैसे है ज़िंदा यहाँ
शनिवार, 25 अगस्त 2012
वडवानल बनाम स्त्री-विमर्श: तारिणी
शान्त हुताशन शैल के नीचे
झाक सको यदि तो झांको
वहाँ दिखेगा ज्वालाओं का
एक अति-उद्विग्न सरोवर |
नहीं दृष्टिगोचर होता है
सहज देखने पर यह सर
लेकिन जब विस्फोट हुताशन
शैल करेगा फिर क्या हो?
किन्तु नहीं विस्फोट
सहज ही हो पाएगा इसका
सदिओं-सहस्राब्दिओं की
तो धूल जमी है इसपर!
और धूल कुछ ऐसी कि
पहले तो पथ की बाधा
फिर कहती मैं बहुत बुरी हूँ
मत तुम ऊपर आना!
सच पूछो तो अगर
कहीं सागर हो उद्वेलित
नहीं हानिकारक होता है
जैसे होती वडवानल |
ना जाने अब सुलग-सुलग कर
आग यहीं मर जाएगी
या फिर होगा पुनः एक
विस्फोट विषमता नाशक?
सोमवार, 6 अगस्त 2012
पिता जी
पिता- एक शब्द नही, एक रिश्ता नही, आधार है जीवन का, बुनियाद है हमारे जीवन की।
एक पिता ही वो चरित्र है, जो समय के साथ अनेक रूप लेत है,कभी पत्थर सा कठोर कभी मोंम । पिता ही एक बालक को व्यक्ति बनाते हैं , समाज में उसकी पहचान बनाते हैं । पिता एक बच्चे को सिर्फ अपना नाम नही देते, अपनी पहचान भी स्थान्तरित करते हैं।
पवन कुमार मिश्रा जी के पिता जी का १ अगस्त २०१२ को अचानक ही हार्ट अटैक के हुआ और कुछ ही पलों में देखते देखते वो चिरनिद्रा में सो गये। इस कठिन समय में हमारी सम्वेदनाऐं उनके तथा उनके परिवार के साथ हैं, ईश्वर उन्हे इस कठिन परिस्थितियों में सामान्य रहते हुये अपने कर्तव्य का पालन करने योग्य धैर्य दे ।
पवन जी के पिताजी का नाम श्री ओंकारनाथ मिश्र है. वह 1950 मे पैदा हुये थे और 1 अगस्त को महाप्रयाण कर गये. वह एक सच्चे कर्मयोगी थे जिन्होने जीवन भर सच का साथ नही छोडा. जौनपुर के छंगापुर गाव मे जन्म और वही मृत्यु. वह पवन जी के पास कानपुर मे ही थे किंतु से दो दिन पूर्व गांव चले गये थे. राखी से एक दिन पहले पवन जी की बुआ आयी थी उन्ही से बात करते करते अचानक सीने मे दर्द की शिकायत की और कोई कुछ करता वह इस दुनिया से प्रस्थान कर गये।
कानपुर ब्लागर्स असोसिएसन ऐसे महापुरुष को अपनी श्रद्धांजलि देता है और शोकसंतप्त परिवार के साथ है.
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