मंगलवार, 17 मई 2011

ये प्यारी गौरैया है




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बच्चों के मन भाती है
उनको खूब रिझाती है
आकर के उनके अंगना
जीभर शोर मचाती है
सोन चिरैया सी लगती
ये प्यारी गौरैया है

हर चेहरे को पहचाने ये
बातें मन की जाने ये
नहीं किसी से बैर करे
लगती पंख खुजाने ये
मुन्ना मुन्नी दाना डालें
पकडे डाल झवईया है

अम्मा खाना लाती है
गौरैया आ जाती है
हलवा पूरी खाने को
अम्मा से इठलाती है
खाकर हलवा पूरी
वो करती ता ता थैया है



5 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sundar baalgeet.
    प्यारी गौरैया sabko lubhati hai..

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  2. कभी कभी बाल गीत मन मोह लेते हैं. अपने बचपन जैसे लगते हैं.

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  3. गोविन्द नारायण जी सुन्दर बाल कविता बचपन की यादें ताजा करा गयीं
    हर चेहरे को पहचाने ये
    बातें मन की जाने ये
    नहीं किसी से बैर करे
    लगती पंख खुजाने ये
    मुन्ना मुन्नी दाना डालें
    पकडे डाल झवईया है

    उत्तर देंहटाएं