रविवार, 5 दिसंबर 2010

ये किधर जा रही शिक्षा ......


शिक्षा का बाजार बने है
ये विघा के मंदिर
शिक्षा छोड के सब मिलता
देखो इसके अंदर

अब पहले से नही रहे
गुरुजन द्रोण के जैसे
ढूढे से भी ना मिलते  
शिष्य भी अर्जुन के जैसे 

हाथ में डिग्री उनके होती 
जिनकी जेब में पैसे 
जिसके पास नही हो पैसा
वो पढने को तरसे

विधार्थी बन रहे कस्टमर 
और टीचर बना इम्प्लाई
स्टूडेंट से कुछ कहे तो समझो 
उसकी जीविका पर बन आई 

बच्चो से ज्यादा रिजल्ट की चिंता 
रोज गुरुवर जी  को है सताती 
एक्साम के दिनों में यही सोच कर
गुरु  जी को नीद भी नहीं आती 

सुबह सवेरे मंदिर जाकर
मन्नत टीचर है  मांगे
और बरगद के पेड़ में जाकर 
मोटे धागे भी बांधे 

बिन शिक्षा के फल फूल रहा
देखो शिक्षा का व्यापार
बिन शिक्षित हुए लोग भी पा रहे 
मेडल नौकरी और उपहार 

शिक्षा का बाजार बने है
ये विघा के मंदिर
शिक्षा छोड के सब मिलता 
देखो इसके अंदर


चित्र के लिए गूगल का आभार
पलाश 

10 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut badhiya likha hai .......... shayad kaafi teachers aur student ise padh kar yahi socheinge ki aap ko unke man ki baat kaise pata

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  2. सही है! एक अध्यापक से बेहतर कौन बयान कर स्कता है शिक्षा का हाल!

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  3. गुड्डोदादी6 दिसंबर 2010 को 12:14 am

    हाथ में डिग्री उनके होती
    जिनकी जेब में पैसे
    जिसके पास नही हो पैसा
    वो पढने को तरसे
    बहुत जोरदार झन्नाटा

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  4. सब बिकाऊ है, शिक्षा क्या शिक्षक भी बिकाऊ है . कितने चाहिए और किस रेट पर चाहिए - मुफ्त आपूर्ति की गारंटी है.

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  5. अच्छा व्यंग है , शिक्षा अब व्यापार बन गयी है .

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  6. बहुत ही अच्छी पोस्ट
    कानपुर ब्लोगर्स असोसिएसन में आ कर लगा की अब अपने घर आ गया हू .
    मुझ को तो पहले से ही इस की तलाश थी और इसी लिए मैंने लखनऊ ब्लोगर्स असोसिएसन में नही गया .मेरी तलाश पूरी हुई

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  7. आपका हार्दिक स्वागत
    अभिषेक जी आप अपना ई मेल पता दे

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  8. आपके पोस्ट का सानीप्य पा कर मन में टखुशी हुई। फिर मिलूगा। मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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