शुक्रवार, 31 मई 2013

अबाधित धार हो प्रभु स्नेह की तुम : तारिणी

 









अज अनन्त निर्विकार
प्राणनाथ करुनागार
निरुद्वेल निरुद्वेग
निश्चल सरोवर चेतसः।
अन्तरज्ञ सर्वज्ञ
शब्द सर्वथा निरर्थ
जानो सब नाथ
करो कृपा काश्यप पर।

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अबाधित धार हो प्रभु स्नेह की तुम
ह्रदय के केंद्र में स्थित शुभ्र आसन ।
मनस् की शुद्धता के स्रोत हो हे!
प्राण का उल्लास हो!
सर्वथा शरण लो प्रभु,
संशय सभी हे! दूर कर दो।
निरंतर तव चरण रत रहे जन और
स्नेह जल से आप्लावित।

मंगलवार, 28 मई 2013

नील चिरैया

एक छोटी सी चिरैया ,नील पंखो वाली ...
आती थी मेरे घर ,बैठ के दीवार पे ,
कलरव करती ,चहक थी उसमे ..
दे देता था दो दाने सूखे हुए चावल ,
और ले उड़ जाती वो उन्हें ...

सोचा एक दिन देखे ये आती है कहा से ?
थोडा नजर दौड़ाई तो दिखा ,शीशम का एक पेड़ .
उसमे बना घोसला उसका ,और छोटे से दो बच्चे उसमे ..
अच्छा लगा देख कर ,शांति सी आई मन में ..

और गर्व भी हुआ मुझको उन दो दाने चावल देने पे ..
आह कितना बड़ा दानी है इन्सान ...मै..

पर कल रात ही वो पेड़ चुपके से काट दिया गया ,
न वो चिरैया थी ,न आज उसका कलरव था घर में ..
हा उस जगह पड़ा था एक टूटा हुआ घोसला ,और कुछ बिखरे हुए पंख .......

"अमन मिश्र "

सोमवार, 27 मई 2013

सफ़र

तम से  घिरता ,जड़ता में बंधता ..
पथ का राही मै ,राहों से लड़ता ..
खुद को ही जला जला मै ,दीपक सा जल जाता हु ..
बस आगे बढता जाता हु ,बस आगे बढ़ता  जाता हु ...

नित नए भ्रमो की भटकन ,
राहों के वो नए नए रंग ,
इन सभी पाशों से उलझा ..
खुद ही तलवार उठता हु ..
बस आगे बढता जाता हु बस आगे बढता जाता हु ...

नित नयी वेला की आशा ,
समय चक्र का खेल तमाशा ,
रखते हुए ह्रदय मोम सा ,
"अमन "पत्थर का बन जाता हु ....
बस आगे बढता जाता हु बस आगे बढता जाता हु ...


            " अमन मिश्र "

note: pic from other blog with a lots of thank you....






गुरुवार, 23 मई 2013

शिक्षा के इस बलात्कार की ओर हमारे युवा मुख्यमंत्री जी कब ध्यान देंगे?

कहने को तो संविधान मे समान कार्य के लिये समान वेतन का प्रावधान है, किंतु व्यवहार मे यह प्रावधान कूडा बन गया है. मै यहा सेल्फ फाईनेंस संस्थाओ मे कार्य कर रहे शिक्षको के प्रति आप लोगो का ध्यान आकर्षित करना चाहता हू. वैसे तो निजी क्षेत्रो मे कार्यरत सभी कर्मचारियो की स्थिति बन्धुआ और बेगारो जैसी हो गयी है लेकिन जो समाज की संरचना मे मुख्य भूमिका निभा रहे है उनकी खस्ताहाल स्थिति को देखते हुये यह कहना मुश्किल नही कि देश किस दिशा मे जा रहा है. निजी स्कूलो महाविद्यालयो और तकनीकी संस्थाओ मे कार्यरत शिक्षक अवसादी मानसिकता के शिकार हो गये है.  निजी कालेजो के प्रबन्धक 'इंफ्रास्टक्चर' और अन्य वाहियात चीजो मे जम कर इनवेस्ट करते है किंतु वेतन और अवकाश के नाम पर धेला भर. शिक्षक की मजबूरी है कि उसे  नौकरी से रोटी और दाल खरीदना है. वैसे भी एक अनार और सौ बीमार वाली स्थिति है. तकनीकी संस्थाओ और महाविद्यालयो मे फ्रेशर के दम से क्लासेज चलती है. जिसमे क्वालिटी के नाम पर भ्रामक लेक्चर दिये जाते है. नाच गाने नौटंकी के नाम पर कालेज किसी नामी गिरामी होटल को टक्कर देते मिल जायेंगे. महिला शिक्षको की एकमात्र ड्यूटी सेंट वेंट लगा कर लिपपुत कर मैनेजर या चीफ  गेस्ट के आगे पीछे मुसकान चिपकाये चलना फिरना ही रह गया है. इन कालेज मे आने वाले छात्र भी मौज मस्ती करते पूरा सेशन बिता देते है क्योकि उन्हे मालूम है कि नकल कर ले तो पास ही हो जाना है. शिक्षा के इस बलात्कार की ओर  हमारे युवा मुख्यमंत्री जी कब ध्यान देंगे? स्थिति बद से बदतर होती जा रही है.  शिक्षा और शिक्षको लत्ता करके कोई भी व्यवस्था ज्यादा दिन तक चल नही सकती समय रहते इस मुद्दे पर न चेता गया तो भारत का अस्तित्व समाप्त होते  देर नही लगेगी.

सोमवार, 13 मई 2013

यही जिंदगी है?

यु बैठा तनहा ,
स्याह पन्नो को पलटता ..
जिंदगी के कुछ लम्हों को  फिर से पाने  को,
आज मै  बेक़रार हू ..

बंद आँखों से ,
लहराते सागर ,घुमड़ते आसमान को  देखता  ,

कल्पना में तेरे साथ को पाता,
खुद में ही खोता , लहरों में झूलता ..
में उन सपनो को फिर से जीने को बेक़रार हू ..

पर फिर याद आता है ,
इस समाज का चेहरा ,
हसता मुस्कुराता ,
जहर  से भरा  ,
बस पीछे हट जाते है मेरे कदम ,

अरमानो को बांध लेता हू खुद के भीतर ही ,
खुद के लिए नहीं ,बस तेरे खातिर ,

समझौते करता ,
एक  झूठी हसी लिए ,
खुद के सपनो को खुद ही तोड़ता ,

सूखे पेड़ सा गिरने का इंतजार करता .
की कब आएगी कोई हवा ले जाएगी तुझे मुझसे दूर ,

कुछ न कह पाउँगा मै ,
मुट्टी भी बंद होगी ,
पर हाथ तो बंधे होगे ,

बस तेरे खातिर ,तेरी मुस्कराहट को  ,
कट जाऊंगा एक  पेड़ सा ,
बिना किसी चीख के ,
बिना किसी रुदन   के .

बस तेरे खातिर ..बस तेरे खातिर ..
आह यही जिंदगी है, यही प्यार है ......................

                                                 "अमन मिश्र"

मंगलवार, 7 मई 2013

बच्चो पर अब तो रहम करें ...

इन दिनों हमारे यहा कितनी ज्यादा गर्मी और उमस हो रही है ..बर्दाश्त के बाहर है ये मौसम ..सुबह छह  बजे से ही  घर के बाहर कदम रखने की हिम्मत नही होती ...इसके बावजूद हमारे यहाँ के स्कूल अभी भी खुले हुए है ....बच्चे दो -दो बजे इस भीषण गर्मी  में ट्रेफिक जाम से जूझते हुए घर  पहुचते  है ..हालाँकि स्कूलों की छुट्टी अब घंटे भर पहले होने लगी है ..पर बच्चों के घर पहुचने के समय में कोई ज्यादा अंतर नही आया .....बहुत से स्कूलों में तो खुले मैदान में प्रार्थना ,खेल के घंटे .भी पूर्ववत  ही है.पानी भी टीचर की  परमीशन के बाद  .मुश्किल से पीने को मिलता है .अच्छी -खासी फीस देने के बावजूद  .कक्षाओं में पंखे बंद रहते है ...रोज़ ही बच्चे बेहोश होकर स्कूल में ही गिर रहे है ....और पढाई भी  न के बराबर हो रही है ....तो क्यों न अब स्कूल से  बच्चो को छुट्टी दे दी जाये ......ताकि बच्चे अनावश्यक कष्ट से बच  सकें  और उन्हें बीमार होने से भी बचाया जा सके  ..

कृपया चित्र देखें



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