रविवार, 4 नवंबर 2012

राष्ट्र सेवा को चल दिए हम , अपना सीना तान के.

बांध मुट्ठी हाथ की ,
सर उठा के शान से .
राष्ट्र सेवा को चल दिए हम ,
अपना सीना तान के .
सर पे बंधा है कफ़न ,
आँखों में अंगारे है,
माँ भारती तुम मुक्त हो,
आ गए लाल तुम्हारे  है .
अब ना कोई आएगा दुश्मन ,
जायेगा वो प्राण से .
राष्ट्र सेवा को चल दिए हम ,
अपना सीना तान के .
फिर से आये कई भगत ,
अपना सब कुछ देने को ,
राष्ट्र की बलिवेदी पे,
प्राण अपने खोने को .
 जागो तुम ,जागे है हम .
गहन निद्रा ध्यान से .
राष्ट्र सेवा को चल दिए हम ,
अपना सीना तान के।    " जय हिन्द "  
                                                                  "अमन मिश्र "

2 टिप्‍पणियां:

  1. जागो तुम ,जागे है हम .
    गहन निद्रा ध्यान से .
    राष्ट्र सेवा को चल दिए हम ,
    अपना सीना तान के
    बहुत ही खूसोरत
    जय हिंद ..........

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